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भारतीय वायुसेना के आदर्श वाक्य

 'नभ: स्पृशं दीप्तम्'

भारतीय वायु सेना का आदर्श वाक्य गीता के ग्यारहवें अध्याय से लिया गया है और यह महाभारत के महायुद्ध के दौरान कुरूक्षेत्र की युद्धभूमि में भगवान श्री क्रष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए उपदेश का एक अंश है। भगवान श्री क्रष्ण, अर्जुन को अपना विराट रूप दिखा रहे हैं और भगवान का यह विराट रूप आकाश तक व्याप्त है जो अर्जुन के मन में भय और आत्म-नियंत्रण में कमी उत्पन्न कर रहा है। इसी प्रकार भारतीय वायु सेना राष्ट्र की रक्षा में वांतरिक्ष शक्ति का प्रयोग करते हुए शत्रुओ का दमन करने का लक्ष्य करती है।

नभ:स्पृशं   दीप्तमनेकवर्णं   व्यात्ताननं दीप्तविशालनेत्रम्      ।

दृष्ट्वा हि   त्वां   प्रव्यथितान्तरात्मा   धृतिं    न   विन्दामि   शमं   च   विष्णो   ।।

हे विष्णो, आकाश को स्पर्श करने वाले, देदीप्यमान, अनेक वर्णों से युक्त तथा फैलाए हुए मुख और प्रकाशमान विशाल नेत्रों से युक्त आपको देखकर भयभीत अन्तःकरण वाला मैं धीरज और शांति नहीं पाता हूं।

बहुत गर्व के साथ, हम इस आदर्श वाक्य को अपने दिलों में गहराई से समाए हुए हैं। अपने पंखों को चौड़ा करके, अधिक से अधिक ऊंचाइयों तक बढ़ते हुए और अपनी सीमाओं को फिर से परिभाषित करते हुए, हम अपने सभी कर्मों में इस दिव्य पाठ को प्रतिबिंबित करते हैं। हासिल  की गई उपलब्धियां हमें ऊंचा उठने के लिए एक नया कदम देता है। इस अद्भुत यात्रा का ईंधन हमारे वायु योद्धा कोड से लिया गया है

वायु योद्धा कोड

रैंक / नियुक्ति, या शाखा / व्यापार, एक व्यक्ति के रूप में भारतीय वायुसेना के चाहे, मैं सबसे पहले एक वायु योद्धा हूँ।
हर कार्य और कर्म में, वायु योद्धा बाकी सब से ऊपर देश की सुरक्षा और सम्मान देता है।
वायु योद्धा हमेशा सबसे कठिन कार्यों के लिए स्वयंसेवकों।
जब आदेश दिया, वायु योद्धा सौंपा मिशन अन्फ्लिन्चिंगली चलाती है और प्रयासों उसकी सुरक्षा के लिए परिणामों की परवाह किए बिना अपनी क्षमता का सबसे अच्छा करने के लिए इसे पूरा करने के लिए।
वायु योद्धा भारतीय वायु सेना के उच्च परंपराओं की पुष्टि की और हमेशा अपने देश और सेवा के लिए ऋण लाने के लिए प्रयास करता है।
व्यावसायिक और अन्यथा, वायु योद्धा उत्कृष्टता जो कुछ भी वह / वह करता है या पर्यवेक्षण के कर्मों।
वायु योद्धा हमेशा ईमानदार और विश्वास सेवा और देश द्वारा उस में रखा / उसके लिए रहता है।
वायु योद्धा शारीरिक रूप से फिट और मानसिक रूप से चुस्त रहता है।
कमान में या प्रभारी अधीनस्थों की, वायु योद्धा उनकी सुरक्षा और कल्याण के लिए कारण चिंता के साथ होता है और क्या वह / वह उनमें से उम्मीद करने के लिए तैयार किया जाता है।
वायु योद्धा निर्दोषिता से बने बाहर है और उसका असर और आचरण से दूसरों के लिए एक रोल मॉडल होने का प्रयास।

भारतीय वायु सेना का प्रतीक चिह्न

क्रेस्ट का प्रयोग वायु सेना में फॉर्मेशनो या यूनिटों की पहचान और विशिष्ठता दिखाने के लिए किया गया है। ये एक तरह के प्रतीक हैं और सैनिकों के लिए प्रेरणा और उत्साहवर्धन के स्रोत हैं। वायु सेना ने कमानों, स्क्वॉड्रनों और अन्य स्थापनाओं के लिए विविध क्रेस्ट अपनाए हैं। भारतीय वायु सेना में क्रेस्ट की एक मानक रूपरेखा है। इस रूपरेखा या फ्रेम के मध्य भाग में फॉर्मेशन का अपना एक प्रतीक चिह्‌न होता है और इसके निचले भाग में घुमावदार डिजाइन में इसका आदर्श-वाक्य दर्शाया होता है। यूनिट क्रेस्ट ३ इंच व्यास के गोले में बनाया जाता है। इस गोले के ऊपरी आधे भाग में यूनिट की फॉर्मेशन का नाम दिखाई पड़ता है जबकि 'भारतीय वायु सेना' निचले आधे भाग में लिखा होता है। क्रेस्ट और आदर्श वाक्य फॉर्मेशन की भूमिका के आधार पर डिजाइन किए जाते हैं। क्रेस्ट भारत के राष्ट्रपति द्वारा अनुमोदित होता है और इसका महान ऐतिहासिक एवं भावनात्मक महत्व होता है। क्रेस्ट सामान्यतया समारोह परेड के दौरान ए ओ सी-इन-सी द्वारा दिया जाता है। क्रेस्ट का महत्व इसी बात से समझा जा सकता है कि इसे एक जगह से दूसरी जगह एक अफसर द्वारा ही ले जाया जाता है।

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