स्क्वाड्रन लीडर जग मोहन नाथ (3946) महावीर चक्र

SQN LDR JM NATH (3946) MVC

पाकिस्तान के विरूद्ध किए गए ऑपरेद्गानों में कैनबरा यूनिट के कमांडिंग अफसर स्क्वाड्रन लीडर जग मोहन नाथ ने कई मिद्गानों में शुगमन के इलाकों पर उड़ान भरी और शुगमन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी इकठ्‌ठी की। ये सभी मिद्गान टोही मिद्गान थे, जिनमें शुगमन के इलाकों और कड़ी सुरक्षा वाले एयरफील्ड और महत्वपूर्ण ठिकानों पर दिन के समय बिना किसी एस्कॉर्ट के लंबी दूरी तक उड़ान भरनी थी। स्क्वाड्रन लीडर नाथ को यह भली-भांति पता था कि वह हर मिद्गान में अपनी जान पर खेलकर उड़ान भर रहे थे, फिर भी वे अपनी स्क्वाड्रन के पायलटों को तैनात करने की अपेक्षा तब तक स्वयं ही उड़ान भरते रहे, जब तक उन्हें आदेद्गा नहीं दे दिया गया कि वे अपने सहकर्मियों को भी इन मिद्गानों में उड़ान भरने दें।

स्क्वाड्रन लीडर नाथ अपने मिद्गानों में जो सूचनाएं इकठ्‌ठी करके लाए, वे इतनी महत्वपूर्ण थीं कि उनके बिना शुगमन के एयरफील्डों और ठिकानों पर किए गए हमारे हमले न तो इतने सफल होते और न ही उतने विनाद्गाकारी जितने उनकी सूचनाओं की बदौलत हो पाए। वस्तुतः इनके मिद्गानों के कारण ही वायु सेना शुगमन के ठिकानों पर सफल हमले कर पाई जिनसे हुए विनाद्गा ने पाकिस्तान के युद्ध के मंसूबों पर पानी फेर दिया।

स्क्वाड्रन लीडर जग मोहन नाथ ने साहस, मजबूत इरादे और उच्च कोटि की कर्तव्यपरायणता का परिचय दिया।

Award Name:
सामान्य कर्तव्यों (पायलट)
Duties:
महावीर चक्र बार

विंग कमांडर विलियम मैक्डोनाल्ड गुडमैन (3571)

WG CDR WM GOODMAN (3571)

विंग कमांडर विलियम मैक्डोनाल्ड गुडमैन ने 01 से 09 सितंबर, 1965 की अवधि के दौरान पाकिस्तान टैंकों और टुकड़ियों के ठिकानों पर शुगमन की भारी हवाई और जमीनी गोलाबारी की परवाह किए बिना कई टोही मिद्गानों और जमीनी हमलों की अगुवाई की। ये अपनी कमान के सभी रैंकों के अफसरों और जवानों के लिए प्रेरणा का स्रोत थे। इनके दिशानिर्देद्गा में यूनिट ने उच्च कोटि की सेवायोग्यता कायम की जिसके कारण शुगमन के ठिकानों पर सफलतापूर्वक कई हवाई हमलों को अंजाम दिया।

विंग कमांडर विलियम मैक्डोनाल्ड गुडमैन ने भारतीय वायु सेना की उच्च परंपराओं का पाालन करते हुए शौर्य और कुद्गाल नेतृत्व का परिचय दिया।

Award Name:
महावीर चक्र
Duties:
सामान्य कर्तव्यों (पायलट)

विंग कमांडर पीपी सिंह (3871)

WG CDR PP SINGH (3871)

विंग कमांडर प्रेम पाल सिंह एक आपरेशनल बॉम्बर स्क्वाड्रन जो थोड़े समय के साथ परिचालन की तैयारियों के एक उच्च पिच हासिल की आफीसर कमांडिंग गया था। 9 वीं सितंबर 1965 तक 6 से इस अवधि के दौरान उन्होंने छह प्रमुख आक्रामक और सामरिक बंद का समर्थन संचालन जो सरगोधा एयरफील्ड जटिल खत्म टोही शामिल चलाया, थपका, Akwal और Marud हवाई अड्डों, पेशावर हवाई क्षेत्र में पाकिस्तानी सेना और हथियार सांद्रता की बमबारी के अंकन विभिन्न क्षेत्रों में। अपनी निजी सुरक्षा की अनदेखी, भारी दुश्मन विरोधी विमान आग का सामना करने में ये बहुत ही खतरनाक कार्यों में, वह दुश्मन के इलाके में गहरी बमबारी और टोही मिशन की एक नंबर का नेतृत्व किया और साहस दृढ़ संकल्प और दृढ़ता के साथ अपने मिशन को अंजाम दिया।

विंग कमांडर प्रेम पाल सिंह भारतीय वायु सेना की सर्वश्रेष्ठ परंपराओं में ड्यूटी, व्यावसायिक कौशल और वीरता के एक उच्च भावना का प्रदर्शन किया।

Award Name:
महावीर चक्र
Duties:
सामान्य कर्तव्यों (पायलट)

स्क्वाड्रन लीडर अज्जमदा बोपय्या देवय्या (4810)

SQUADRON LEADER AJJAMADA BOPAYYA DEVAYYA (4810) VM

स्क्वाड्रन लीडर अज्जमदा बोपय्या देवय्या को एक स्ट्राइक फॉर्मेद्गान के सदस्य के रूप में 07 सितंबर 1965 को 0555 बजे उड़ान भरने तथा पाकिस्तान के कड़ी सुरक्षा वाले सरगोधा एयरफील्ड पर हमला करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस मिद्गान में स्क्वाड्रन लीडर देवय्या के अतिरिक्त सभी सदस्य सुरक्षित बेस लौट आए। उस समय तक इनके बारे में कोई जानकारी उपलब्ध न होने के कारण, इन्हें 'युद्ध में लापता' घोषाित कर दिया गया।

काफी खोजबीन करने के बाद और उस दिन उड़ान भरने वाले पायलटों के साथ कई बार बात करने पर अंतिम रूप से यह साबित हुआ कि स्क्वाड्रन लीडर देवय्या ने अदम्य साहस के बड़े कारनामे को अंजाम दिया। सरगोधा एयरफील्ड पर निर्धारित समय पर सफल हमला करने के बाद स्क्वाड्रन लीडर देवय्या के मिस्टेयर वायुयान को पाकिस्तानी सुपरसॉनिक एफ-१०४ फाइटर वायुयान द्वारा इंटरसेप्ट किया गया जो पाकिस्तानी वायु सेना की शान माना जाता था। एफ-104 के पायलट ने पहले हवा से हवा में मार करने वाली साइडविंडर मिसाइल दागी जिससे स्क्वाड्रन लीडर देवय्या बच निकले और मिसाइल जमीन पर जा गिरी। परंतु एफ-१०४ अपनी तीव्र गति के कारण तेजी से मिस्टियर के समीप आ गया और अपनी २० एम एम मल्टीबैरल से फायरिंग कर स्क्वाड्रन लीडर देवय्या के मिस्टेयर वायुयान को नुकसान पहुंचाने में सफल रहा। एफ-१०४ अपनी तीव्र गति के कारण मिस्टेयर से आगे निकल गया। स्क्वाड्रन लीडर देवय्या अपनी जान की परवाह किए बिना बड़ी बहादुरी से अपने क्षतिग्रस्त मिस्ेटयर वायुयान को एफ-१०४ के पीछे उड़ाते रहे। उनका यह निर्णय घातक था क्योंकि मिस्टेयर का एफ-१०४ से मुकाबला करते हुए अपनी अधिकतम रेंज पर उड़ान भरने का मतलब बेस में वापस लपौटने की संभावना को बेहद कम करना था। न तो पाकिस्तानी पायलट की उड़ान कुद्गालता और न ही एफ-१०४ की शानदार कार्यक्षमता स्क्वाड्रन लीडर देवय्या के दृढ़ निद्गचय और एकमात्र उद्‌देश्य के आगे टिक नहीं पाए। आखिरकार इन्होंने अपने क्षतिग्रस्त वायुयान का कुद्गालतापूर्वक संचालन करते हुए एफ-१०४ को माार गिराया। इसके बाद यह अनुमान लगाया गया कि स्क्वाड्रन लीडर देवय्या अपने वायुयान को नियंत्रित करने में असमर्थ रहे और कम ऊंचाई पर वायुयान से निकलने में विफल होने अथवा अपने वायुयान के क्षतिग्रस्त होने के कारण दुर्घटना में शहीद हो गए।

स्क्वाड्रन लीडर अज्जमदा बोपय्या देवय्या ने शुगमन का डटकर मुकाबला करते हुए असाधारण शौर्य के शानदार कारनामे को अंजाम दिया।

Award Name:
महावीर चक्र
Duties:
सामान्य कर्तव्यों (पायलट)

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