अंतरिक्ष आयुर्विज्ञान संस्थान

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आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के बारे में

अंतरिक्ष आयुर्विज्ञान संस्थान ने मार्च 2011 के दौरान आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) की स्थापना की। तब से आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी), संस्थान का एक अभिन्न अंग रहा है, जो संस्थान के कामकाज के अलग-अलग पहलुओं में प्रबुद्ध, सुसंगत और उत्प्रेरक सुधार हेतु एक प्रणाली विकसित करके गुणवत्ता वृद्धि के लक्ष्यों को साकार करने की दिशा में काम करता है। आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) के कार्य निम्नानुसार हैं: -

(क) संस्थान की विभिन्न शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियों के लिए गुणवत्ता बेंचमार्क / मापदंडों का विकास और अनुप्रयोग।

(ख) सहभागी शिक्षण और सीखने की प्रक्रिया के लिए आवश्यक ज्ञान और प्रौद्योगिकी को अपनाने के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और संकाय परिपक्वता के लिए अनुकूल शिक्षार्थी-केंद्रित वातावरण के निर्माण की सुविधा प्रदान करना।

(ग) गुणवत्ता से संबंधित संस्थागत प्रक्रियाओं पर छात्रों से फीडबैक प्रतिक्रिया की व्यवस्था।

(घ) गुणवत्ता सुधार के करनेवाले विभिन्न कार्यक्रमों/गतिविधियों का दस्तावेजीकरण।

(ड़) गुणवत्ता संबंधी गतिविधियों जिसमें सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाना और उसका प्रसार शामिल है,के समन्वय के लिए संस्थान की एक नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करना।

(च) संस्था में गुणवत्ता संस्कृति का विकास।

(छ) एनएएसी के दिशानिर्देशों और मापदंडो के अनुसार एनएएसी को प्रस्तुत किए जानेवाली वार्षिक गुणवत्ता आश्वासन रिपोर्ट (एक्यूएआर) तैयार करना।

आईक्यूएसी कॉलेज के महत्वपूर्ण घटकों में से एक है जो कॉलेज की सभी इकाइयों/पहलुओं में गुणवत्ता और निरंतर सुधार सुनिश्चित करता है।

सर्वोत्तम प्रथाएं – अंतरिक्ष आयुर्विज्ञान संस्थान

1. प्रथम प्रथा का शीर्षक - वैश्विक दक्षताओं को बढ़ावा देना

(क) लक्ष्य- पीजी रेज़ीडेन्ट्स को शैक्षिक और पाठ्येतर पहलुओं में अन्य प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मेडिकल स्कूलों के छात्रों और शिक्षकों के साथ बातचीत करने और प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देने के अवसर प्रदान करना ताकि वे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हों।

(ख) संदर्भ- आईएएम की दूरदर्शिता और मिशन से संबंधित कथन संस्थान की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में से एक होने की इच्छा को दर्शाते हैं। इस दिशा में, आईएएम प्रबंधन अपने बुनियादी ढांचे, प्रदान किए गए प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार और उत्कृष्टता की खोज के प्रति अपने छात्रों के दृष्टिकोण को प्रेरित करने और बदलने के लिए अथक प्रयास कर रहा है।

(ग) प्रथा- वैश्विक दक्षताओं को बढ़ावा देने के लिए छात्रों में नवाचार और सर्वोत्तम प्रथाओं की संस्कृति पैदा की जाती है। इसके अलावा, छात्रों को विभिन्न हितधारकों, पूर्व छात्रों और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष आयर्विज्ञान विशेषज्ञों के साथ बातचीत करने के अवसर प्रदान किए जाते हैं ताकि वे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हों। कॉलेज का आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर और चिकित्सा उपकरण अत्याधुनिक हैं।

(घ) सफलता का साक्ष्य- इस संस्थान से उत्तीर्ण होने वाले छात्र अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों में अच्छी स्तर पर काम कर रहे हैं।

(ड़) सामना की गईं समस्याएं और अपेक्षित संसाधन- प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढांचे की आवश्यकताओं को उन्नत करने के लिए वित्त के संदर्भ में संसाधनों की निरंतर आवश्यकता होती है।

2. द्वितीय प्रथा का शीर्षक - ह्यूमन सेंट्रीफ्यूज का उपयोग करते हुए प्रदर्शन को बढ़ाने के लिए एयरक्रू का प्रशिक्षण।

(क) लक्ष्य- निष्पादन में वृद्धि के लिए मानव अपकेन्द्रण (सेंट्रीफ्यूज) का उपयोग करके एयरक्रू प्रशिक्षण पर अंतरिक्ष आयुर्विज्ञान पाठ्यक्रम के स्नातकोत्तर छात्रों को व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना।

(ख) संदर्भ - किसी भी वायु सेना की आक्रामक और रक्षात्मक क्षमताएं काफी हद तक वायुयानों की गतिशीलता पर निर्भर करती हैं। एयरक्रू हमेशा खासकर लड़ाकू विमानों में अनेक प्रकार के तनाव वाले माहौल में काम करता है। भू-आधारित सिमुलेटर का उपयोग अक्सर तनावपूर्ण परिस्थितियों में उड़ान भरने के दौरान होने वाले शारीरिक परिवर्तनों के प्रदर्शन के साथ-साथ इन परिस्थितियों के अनुकूल होने के लिए उन्हें प्रशिक्षण देने के लिए किया जाता है। संस्थान में अंतरिक्ष आयुर्विज्ञान विशेषज्ञ की जिम्मेदारी है कि वह उच्च निष्पादन वाले मानव अपकेन्द्रण(सेंट्रीफ्यूज) का उपयोग करके प्रशिक्षण कराए।

(ग) प्रथा- अंतरिक्ष आयुर्विज्ञान के पोस्ट ग्रेजुएट प्रशिक्षुओं को मानव अपकेन्द्रण (सेंट्रीफ्यूज) के संचालन पर व्यपाक रूप से प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वे एयरक्रू को स्वतंत्र रूप से प्रशिक्षण प्रदान कर सके।

(घ) सफलता का साक्ष्य - रेज़ीडेन्ट्स उच्च निष्पादन वाले मानव अपकेन्द्रण (सेंट्रीफ्यूज) को संचालित करने और विभाग की आवश्यकताओं के अनुसार प्रशिक्षण देने में सक्षम हैं।

(ड़) सामना की गईं समस्याएं - उपलब्ध मानव अपकेंद्रित्र एक आधुनिक परिष्कृत विमानन सिम्युलेटर है। गैर-तकनीकी पृष्ठभूमि से होने के कारण, शुरू में रेज़ीडेन्ट्स इस उपकरण को इस्तेमाल करने के प्रति आशंकित होते हैं। तकनीकी कर्मचारियों की सहायता से, वे इन कठिनाइयों को दूर करते हैं और प्रशिक्षण के प्रारंभिक चरण में सिम्युलेटर को प्रभावी ढंग से और सुरक्षित रूप से संचालित करने का विश्वास हासिल करते हैं।

3. तीसरी प्रथा का शीर्षक - अखिल भारतीय अध्ययन यात्रा जिसमें नौसेना उड्डयन केंद्रों, इसरो, डीआरडीओ प्रयोगशालाओं और भारतीय वायुसेना के प्रीमियर फ्लाइंग स्टेशनों का दौरा शामिल है।

(क) लक्ष्य- अंतरिक्ष आयुर्विज्ञान के युवा प्रशिक्षुओं को एयरक्रू और स्पेस क्रू के संचालन की संभावना वाले और नियोजित किये जा रहे संभावित प्रतिउपायों वातावरण वाले वातावरण के बारे में व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना।

(ख) संदर्भ - अंतरिक्ष आयुर्विज्ञान बदले हुए वातावरण में स्वास्थ्य के रखरखाव और एयरक्रू के निष्पादन से संबंधित एक अनूठी विशेषता है। इन विशिष्ट केंद्रों/रक्षा प्रयोगशालाओं का दौरा छात्रों को उड़ने वाले कपड़ों, जीवन रक्षक प्रणालियों आदि के स्वदेशीय के प्रयासों में शामिल विभिन्न प्रक्रियाओं से अवगत कराता है। उड़ान स्टेशनों के दौरे से उन्हें कॉकपिट ज्यामिति और उड़ान के वातावरण को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिलेगा।

(ग) प्रथा - प्रयोगशालाओं और उड़ान स्टेशनों के शैक्षिक दौरे संस्थान के एक वरिष्ठ संकाय की उपस्थिति में किए जाते हैं। डीआरडीओ प्रयोगशालाओं के दौरे से प्रशिक्षुओं को उड़ने वाले कपड़ों, जीवन रक्षक प्रणालियों आदि के विभिन्न उप-प्रणालियों के डिजाइनरों और फैब्रिकेटरों के साथ बातचीत करने का अवसर मिलता है। इससे उन्हें विभिन्न एयरक्रू उपकरणों के स्वदेशीकरण और प्रमाणन प्रक्रिया में शामिल जटिलताएं भी समझ में आती है।

(घ) सफलता का साक्ष्य - शैक्षिक दौरों के बाद छात्रों के साथ बातचीत से विमानन पर्यावरण के बारे में उनकी समझ में हुए उल्लेखनीय सुधार के बारे में पता चलता है। यह देखा गया है कि वे उपयोगकर्ता आबादी के सामने आनेवाली जमीनी हकीकतों और समस्याओं के बारे में अधिक जागरूक हो जाते हैं।

(ड़) सामना की गईं समस्याएं- यात्राओं के लिए अनुमति प्राप्त करने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में स्थित प्रयोगशालाओं/इकाइयों के साथ समन्वय (समय के साथ विकसित होने वाली नई सुविधाएं) स्थापति करना एक कठिन प्रक्रिया है। सुरक्षा चिंताओं के कारण, अधिकतम कवरेज प्राप्त करने के लिए इष्टतम तरीके से यात्रा की योजना बनाने के लिए तारीखों की पुष्टि पहले से ही की जानी चाहिए।

4. प्रथा का शीर्षक - अंतरिक्ष आयुर्विज्ञान में पीजी रेज़ीडेन्टस का 360 डिग्री प्रशिक्षण

(क) लक्ष्य - अंतरिक्ष आयुर्विज्ञान अत्यंत विशिष्ट व्यावसायिक अभिविन्यास का एक अनूठा क्षेत्र है। हमारा उद्देश्य न केवल विश्व स्तर के विशेषज्ञों को तैयार करने के लिए शिक्षा के उच्चतम मानकों वाले स्नातकोत्तर रेज़ीडेन्ट्स को प्रशिक्षण प्रदान करना है, बल्कि इस क्षेत्र में उभरते विशेषज्ञों को एक सैन्य एयरोस्पेस मेडिकल प्रैक्टिशनर की भूमिका निभाने के लिए तैयार करना भी है। भारतीय सशस्त्र बलों के विशेषज्ञ अधिकारी की यह भूमिका मानव प्रदर्शन और उड़ान की सुरक्षा में सुधार के अनुरूप होती है, जो संस्थान की प्रशिक्षण गतिविधियों का प्राथमिक उद्देश्य है। इसमें न केवल अकादमिक उत्कृष्टता शामिल है, बल्कि उन्हें व्यक्तिगत विकास और पेशेवर संतुष्टि के लिए भी सशक्त बनाता है।

(ख) संदर्भ - स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम शर्तों को पूरा करने के लिए शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हैं। नतीजतन, प्रशिक्षण हमेशा भूमिका सीखने के दृष्टिकोण से जुड़े शिक्षा पर केंद्रित होता है। यह व्यक्ति का, एक विशेषज्ञ अधिकारी के रूप में समग्र विकास होने नहीं देता। अंतरिक्ष आयुर्विज्ञान मुख्य रूप से गतिशील अंतरिक्ष वातावरण में एयरक्रू के स्वास्थ्य और प्रदर्शन से संबंधित है, जो स्वाभाविक रूप से जोखिमों से भरा हुआ है। विशेषज्ञ की भूमिका केवल क्लिनिक या केवल शोध तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उड़ान के सेट-अप में मित्र और मार्गदर्शक की भूमिका अपनाने के लिए है। उड़ान सुरक्षा के मूल सिद्धांत, ऑपरेटर और एविएटर को मानसिक और शारीरिक स्वस्थ्ता, वह पहलू जिसकी अंतरिक्ष चिकित्सक द्वारा लगाता निगरानी रखी जाती है, के उच्च स्तर को बनाए रखने को बाध्यकारी बनाते हैं। चिकित्सक में विश्वास अनिवार्य है और यह तभी प्राप्त होता है जब वह विशेषज्ञ को अपने में से एक के रूप में पहचानता है। विशाल अनुभव के साथ संस्थान के योग्य सक्षम शिक्षण संकाय का चयन प्रमुखतः योग्यता और स्वीकृत योगदान के आधार पर किया जाता है।

(ग) प्रथा – अंतरिक्ष आयुर्विज्ञान संस्थान ने विशेषज्ञ के सर्वांगीण विकास के लिए 360 डिग्री दृष्टिकोण अपनाया। हमने इसे हासिल करने के लिए साक्ष्य-आधारित हस्तक्षेपों और प्रक्रियाओं को लागू किया। यह सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कि विशेषज्ञ संगठन के साथ-साथ समुदाय के भी सक्षम सदस्य हैं। इस तरह का प्रशिक्षण दृष्टिकोण इस संस्थान के लोकाचार - नवाचार, आत्मसात और प्रेरिणा के अनुरूप है । साक्ष्य-आधारित 360 डिग्री दृष्टिकोण के छह प्रमुख घटक हैं:-

(i) विकसित हो रही प्रौद्योगिकियों के साथ सीखने के तौर-तरीकों में सुधार। इसमें केवल तथ्यों को याद रखने के बजाय शिक्षा में उच्च प्रकार की सोच को बढ़ावा देना, अवधारणाओं, प्रक्रियाओं, प्रक्रियाओं और सिद्धांतों का विश्लेषण और मूल्यांकन करना शामिल है। इसमें फीडबैक आधारित प्रशिक्षण, वन-ऑन-वन शिक्षण और मेंटरिंग शामिल है।

(ii) गुणवत्तापूर्ण संस्कृति को बनाए रखना, एक संस्कृति जिसका अर्थ है इसे तब भी सही करना जब कोई नहीं देख रहा हो। प्रशासन और संकाय लगातार छात्रों, एयरक्रू और अन्य चिकित्सा कर्मियों को अनुसंधान करने, एयरक्रू के मूल्यांकन और एयरोमेडिकल कंसल्टेंसी को दिए जानेवाले प्रशिक्षण में गुणवत्ता के उच्चतम मानकों को प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। यह प्रशिक्षण में गुणवत्ता के आंतरिककरण और संस्थागतकरण द्वारा प्राप्त किया जाता है।

(iii) सीखने में वृद्धि - समावेशी अभ्यास जिसमें छात्र दिन-प्रतिदिन के प्रशिक्षण कार्यक्रमों, अपनी टीम की निगरानी से लेकर प्रशिक्षण के स्वतंत्र संचालन तक में भाग लेते हैं। इसमें 'हैंड्स-ऑन' दृष्टिकोण के माध्यम से सीखना, स्वतंत्र सोच, सहज कौशल को बढ़ाना, सह-पाठ्यचर्या संबंधी गतिविधियों को बढ़ावा देना और आत्मविश्वास को बढ़ावा देने के लिए पारितोषिक प्रणाली का प्रदर्शन करना शामिल है।

(iv) सहज क्षमताओं को बढ़ावा देना - प्रत्येक व्यक्ति की सहज लेकिन निष्क्रिय क्षमताओं, रचनात्मकता और क्षमताओं को बढ़ावा देना जो अक्सर सामने नहीं आती हैं और कई बार आत्मविश्वास की कमी का कारण बनती हैं। संस्थान यह सुनिश्चित करता है कि प्रशिक्षुओं को इस तरह से पोषित किया जाए कि वे उपयोगी और सही निर्णय लेने में सक्षम हों और साथ ही बिना किसी हिचकिचाहट और असंतोष के परिणामों के लिए जिम्मेदार हों। प्रारंभिक चरण से, प्रशिक्षुओं को एक वक्ता के रूप में विशेष रूप से शिक्षण और भाषण देने में संचार के पहलुओं में ध्यान देने के लिए तैयार किया जाता है।

(v) अन्य क्षेत्रों और संगठनों के संकाय और कर्मियों के साथ बातचीत बढ़ाना। संस्थान बढ़िया दोतरफा की बातचीत को प्रोत्साहित करता है और रेज़ीडेन्ट्स को चिकित्सा और विमानन क्षेत्रों से संबंधित संगठनों के साथ परामर्श प्रक्रिया में शामिल करता है।

(vi) समग्र दृष्टिकोण - संस्थान ने सभी स्तरों पर अपने प्रशिक्षुओं के समग्र प्रशिक्षण के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाया और कार्यान्वित किया है। संस्थान का मानना है कि अंतरिक्ष आयुर्विज्ञान में विशेषज्ञ तैयार करने के लिए केवल ज्ञान का हस्तांतरण पर्याप्त नहीं है। इसलिए, पाठ्यक्रम की रूपरेखा जो एक सतत विकसित होने वाली प्रक्रिया है, में व्यक्तित्व विकास, एकीकरण और जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रशिक्षण शामिल है।

(घ) सफलता का साक्ष्य विकसित हो रही प्रौद्योगिकियों के साथ लगातार सुधार करना और समय से आगे रहना, संस्थान की ताकत रही है। संस्थान का उद्देश्य केवल तथ्यों को याद रखने के बजाय शिक्षा में उच्च प्रकार की सोच जैसे कि अवधारणाओं, प्रक्रियाओं, प्रक्रियाओं और सिद्धांतों का विश्लेषण और मूल्यांकन करना, को बढ़ावा देना है, । सीखने को बढ़ाने की पहल को आगे बढ़ाते हुए, संस्थान लगातार तौर-तरीकों को विकसित कर रहा है। इसके परिणामस्वरूप न केवल पीजी रेज़ीडेन्ट्स का उत्तीर्ण प्रतिशत अधिक रहा है, बल्कि उच्च औसत और संतुष्टि भी हुई है। संस्थान को मार्च 2017 में दूसरे चक्र के दौरान एनएएसी की ए+ ग्रेडिंग से सम्मानित किया गया था। संस्थान द्वारा अपनाई गई सर्वोत्तम प्रथाओं की केस स्टडी, मई 2017 में प्रतिष्ठित डी.एल. शाह पुरस्कार के लिए विचार के लिए प्रस्तुत की गयी थी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के क्षेत्र में स्टॉलवॉर्ट द्वारा तीन चरण के कड़े मूल्यांकन अर्थात केस स्टडी प्रस्तुत करने, भारतीय गुणवत्ता परिषद, नई दिल्ली में प्रस्तुति और क्यूसीआई मूल्यांकनकर्ता द्वारा साइट का दौरा करने के बाद संस्थान को अंततः 23 सितंबर 2017 को, नई दिल्ली में शिक्षा श्रेणी में सर्वोच्च 12वें डी.एल. शाह प्लेटिनम पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

(ड़) सामना की गईँ समस्याएं – अंतरिक्ष आयुर्विज्ञान संस्तान भारतीय वायुसेना का एक प्रमुख संस्थान है, जिसके ऊपर पोस्ट ग्रेजुएट रेजिडेंट्स और तीनों सेवाओं के एयरक्रू के साथ-साथ मित्र देशों के प्रशिक्षु अधिकारियों को प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी है। सिविल गवर्निंग नीतियां और प्रत्यायन परिषद, परिसर में वाई-फाई की उपलब्धता को अनिवार्य बनाती है। संस्थान ने इंटरनेट एक्सेस करने के लिए हाई-स्पीड केबल इंटरनेट कनेक्शन तैयार किए हैं। संस्थान एक स्नातकोत्तर शिक्षण संस्थान है, जो 70 से अधिक दीर्घ और अल्प अवधि के पाठ्यक्रमों, सैन्य, अर्धसैनिक और नागरिक एयरक्रू के चिकित्सा मूल्यांकन, महत्वपूर्ण और समकालीन विमानन मुद्दों पर अनुसंधान और सैन्य विमानन के लिए महत्वपूर्ण परामर्श के कारण कार्यभार के संदर्भ में प्रतिबद्धताओं के साथ है। हालांकि, एकमात्र अंतरिक्ष आयुर्विज्ञान संस्थान होने के कारण, शिक्षण अस्पतालों के विपरीत, शिक्षकों की इष्टतम / वांछनीय संख्या को प्रशिक्षित करना मुश्किल है। संस्थान की विशिष्टता, और राष्ट्रीय स्तर पर इसकी भूमिका, जैसा कि एनएएसी पीयर टीम द्वारा सुझाया गया है, 'राष्ट्रीय महत्व के संस्थान' के रूप में एक विशेष स्टेटस दिए जाने के योग्य है। इसके लिए उचित माध्यम से मामला प्रक्रियाधीन है।

(च) टिप्पण (वैकल्पिक) - अंतरिक्ष आयुर्विज्ञान संस्थान अपने सभी प्रशिक्षुओं और संकाय के लिए जीवन की उच्च गुणवत्ता जिसमें भारतीय वायु सेना और हमारे महान देश के मूल्य नीतियां शामिल है, प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयास करता है। यह सुनिश्चित किया जाता है कि सभी प्रशिक्षुओं को परिसर में जीवन की अच्छी गुणवत्ता के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और उत्पादक रोजगार के साथ राष्ट्र के व्यापक और गुणात्मक विकास के लिए सशक्त बनाया जाए। अंतरिक्ष आयुर्विज्ञान संस्थान लगातार अंतरिक्ष आयुर्विज्ञान प्रशिक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने का प्रयास कर रहा है। इसने स्नातकोत्तर प्रशिक्षण के लिए 360 डिग्री दृष्टिकोण को अपनाया, आंतरिक और संस्थागत बनाया है, जो पहले से ही सकारात्मक परिणाम दे रहा है। यह दृष्टिकोण गतिशील, लचीला और सहभागी है। हमें विश्वास है कि इस दृष्टिकोण के सभी घटक साक्ष्य आधारित हैं और कठोर परिणाम उपायों पर इनका मूल्यांकन जारी रहेगा।

संस्थान की विशिष्टता

आईएएम भारत और पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया में स्नातकोत्तर एमडी एयरोस्पेस मेडिसिन की डिग्रीप्रदानकरने वाला एक प्रमुख संस्थान है।एयरोस्पेस मेडिसिन एक बहुत ही विशिष्ट व्यावसायिक अभिविन्यास वाला एक अनूठा क्षेत्र है।संस्थान के पास अत्याधुनिक सिमुलेटर हैं जो दुनिया में सर्वश्रेष्ठ हैं।संस्थान का उद्देश्य स्नातकोत्तर छात्रोंको शिक्षा के उच्चतम मानकों के साथ प्रशिक्षण प्रदान करना है।इसका उद्देश्य विश्व स्तर के विशेषज्ञ तैयार करना और इस क्षेत्र में उभरते विशेषज्ञों को एक सैन्य/नागरिक विमाननचिकित्सा व्यवसायी की भूमिका निभाने के लिए तैयार करना है।भारतीय सशस्त्र बलों के विशेषज्ञ अधिकारी की यह भूमिका मानव प्रदर्शन और एयरोस्पेस सुरक्षा में सुधार के अनुरूप है।प्रशिक्षण के अलावा, संस्थान भारत में वांतरीक्षऔषधिगतिविधि का केंद्र है, जिसमें नागरिक विमाननऔर सैन्य विमाननदोनों क्षेत्र शामिल हैं।संस्थान विभिन्न पीएसयू और डीआरडीओ प्रयोगशालाओं को एयरोमेडिकल मुद्दों पर परामर्श भी प्रदान करता है।यह इसरो को गगनयान परियोजना (मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम) के लिए मूल्यवान सलाहऔर परामर्श भी प्रदान कर रहा है।

 

RESULTS OF MD AEROSPACE MEDICINE

 

Year

Number of students appeared in the final year examination

Number of students passed in final year examination

2016

08

07

2017

04

04

2018

06

03

2019

08

08

2020

07

06

 

ANNUAL ENROLLMENT OF STUDENTS INTO THE COURSE

 

Year

Number of seats sanctioned

Number of students admitted

2015-16

10

06

2016-17

10

08

2017-18

10

08

2018-19

10

10

2019-20

10

09

2020-21

10

10

 

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