प्रशिक्षण कमान 

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भारतीय वायु सेना विधेयक के अधिनियम बनने पर भारतीय वायु सेना का गठन ८ अक्तूबर ३२ को हुआ, भारतीय वायु सेना के अस्तित्व में आने से पहले छः वर्ヤा के दौरान इसके पास एक ही स्क्वाड्रन था। सितंबर ३९ में जब द्वितीय विद्गव युद्ध हुआ तब भारतीय वायु सेना की नफरी में १६ अफसर और १४४ हवाई सिपाही थे। पायलटों का प्रद्गिाक्षण क्रेनवेल (यू के) में और तकनीकी कार्मिकों को वायुयान डिपो, कराची प्रद्गिाक्षित किया गया। उनका तकनीकी प्रद्गिाक्षण ब्रिटिद्गा गैर कमीद्गान प्राप्त अधिकारियों की स्क्वाड्रन निरीक्षण के अधीन जारी रहा। प्रद्गिाक्षण के विद्गिाヤट केंद्र भारत में स्थापित नहीं हुए थे।
युद्ध के आगमन के साथ जापान का धुरी (।ग्प्ै) द्याक्तियों की ओर झुकाव संभावित दुद्गमन साबित हुआ। इसलिए भारतीय वायु सेना को दक्षिण पूर्व युद्ध क्षेत्र को आत्मनिर्भर द्याक्ति बनाने की आवद्गयकता थी। इससे भारतीय वायु सेना का तीव्र विस्तार हुआ। भारतीय वायु सेना की १० स्क्वाड्रन द्याामिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। विस्तार के साथ-साथ पायलटों और तकनीकी कार्मिकों की वृद्धि की आवद्गयकता पड़ी। तकनीकी कार्मिकों को प्रद्गिाक्षण के लिए, अंबाला में १९४० में तकनीकी प्रद्गिाक्षण स्कूल का निर्माण हुआ।

१९३९ से पहले भारत में किसी तरह का प्रद्गिाक्षण, चाहे पायलट का या ग्राउंड इंजीनियर हो, नहीं होता था, इस उद्‌देद्गय के लिए भारतीय वायु सेना मुखयालय स्तर पर किसी भी संगठन का निर्माण नहीं किया गया था। हालांकि, जब युद्ध के चलते भारतीयों को प्रद्गिाक्षण के लिए यू के भेजना मुद्गिकल हो गया था तो अपने देद्गा में ही प्रद्गिाक्षण सुविधा प्रदान कराने का निर्णय लिया गया।

भारतीय वायु सेना के विस्तार को पूरा करने हेतु, ३०० पायलट और ३००० तकनीकी कार्मिकों की भर्ती का लक्ष्य निर्धारित किया गया। बाद में ग्राउंड तकनीकी और गैर तकनीकी कार्मिकों की संखया को बढ़ाने की मांग तो २७५० प्रतिमाह का लक्ष्य निर्धारित हुआ। इतने बड़े प्रद्गिाक्षण को पूरा करने के लिए वायु सेना मुखयालय में प्रद्गिाक्षण निदेद्गाालय का निर्माण किया गया।
भारतीय वायु सेना के विस्तार के निर्णय पर लाहौर में टे्रनिंग सेंटर (अनुद्गाासन तथा ड्रिल इत्यादि के लिए) और गैर तकनीकी केंद्र नं. १ का निर्माण किया गया। अंबाला के तकनीकी स्कूल तकनीकी प्रद्गिाक्षण दिया करते थे जिसका निर्माण प्रद्गिाक्षुओ को पासिंग आउट के बाद यूनिट में जाने के लिए सभी उत्तरदायित्वों को उपयुक्त रूप से निभाने के लिए किया गया। ये व्यवस्था १९४७ तक चलती रही। भारत के स्वतंत्र होने और पाकिस्तान के बनने के बाद अविभाजित भारत में भारतीय वायु सेना की संपत्ति का विभाजन हुआ। विभाजित होने के लिए एकल इंजन फाइटर्स (टेम्पेस्ट) के आठ स्क्वाड्रन और दोहरे इंजनयुक्त दो मध्यम परिवहन वाले वायुयान के दो स्क्वाड्रन थे। ए सी (डकोटा) के दो लड़ाकू और एक ट्रांसपोर्ट को पाकिस्तान स्थानांतरित किया गया और एक ट्रांसपोर्ट स्क्वाड्रन भारत में ही रहा।

प्रशिक्षण स्थापना विभाजन अंतराヤट्रीय सीमाओं के आधार पर किया गया। जो प्रद्गिाक्षण स्थापनाएं भारत के प्रभुत्व में थी वे भारत में रहीं और जो पाकिस्तान में स्थापित थीं वे पाकिस्तान में चली गई। हालांकि विभाजन के समय प्रद्गिाक्षण प्रगति पर था, ये निद्गिचत किया गया कि जब तक वह कोर्स पूरा न हो जाए प्रद्गिाक्षण संयुक्त रूप से चलता रहेगा। संयुक्त प्रद्गिाक्षण अक्तूबर के अंत में समाप्त हुआ जब प्रद्गिाक्षुओं और कर्मियों ने अपने पसंदीदा देद्गाों में कार्यग्रहण किया।
१५ अगस्त १९४७ को भारत में स्थित प्रद्गिाक्षण स्थापनाएं थी।

• प्रारंभिक प्रद्गिाक्षण विंग, कोयम्बटूर जिसकी स्थापना ११ जुलाई ४६ में हुई।
• एलिमेंट्री फ्लाइंग टे्रनिंग स्कूल, जोधपुर की स्थापना जुलाई १९४२ में हुई।
• एडवांस फ्लाइंग टे्रनिंग स्कूल अंबाला की स्थापना जुलाई १९४१ में हुई।
• नं. १ ग्राउंड टे्रनिंग स्कूल, जालहल्ली की स्थापना जुलाई १९४७ में हुई।
• नं. २ ग्राउंड टे्रनिंग स्कल, तांबरम की स्थापना फरवरी १९४७ में हुई।

नं. २ (भारतीय) ग्रुप आर ए एफ जो बैंगलोर में स्थित एयर कमोडोर एडम ए ओ सी थे, वे भारत की स्वतंत्रता के बाद वायु सेना में भर्ती होने वालों के लिए प्रद्गिाक्षण और ग्राउंड प्रद्गिाक्षण के लिए उत्तरदायी थे। दोनों फ्लाइंग प्रद्गिाक्षण स्कूल हालांकि वायु सेना मुखयालय के प्रत्यक्ष नियंत्रण में रहेंगे। १५ सितंबर १९४७ में नं. २ (भारतीय) ग्रुप आर ए एफ का नाम बदलकर नं. २ (प्रद्गिाक्षण) गु्रप आर ए एफ रखा गया और एयर कमोडोर नरेंद्र ने अक्तूबर ४१ को ए ओ सी के तौर पर कार्यभार ग्रहण किया।

मुख्यालय प्रशिक्षण कमान का जन्म १९४८ में वायु सेना मुखयालय का पुनगईठन ककया गया। २२ जुलार् १९४९ में नं. २ (प्रकगािण) ग्रुप की पुनसईरंचना प्रकगािण कमान के नाम से हुर्। प्रकगािण कमान का मूल रूप से तनयंत्रण केवल जमीनी प्रकगािण स्कथापनाओं पर था, उड़ान प्रकगािण प्रत्यि रूप से वायु सेना मुखयालय के तनयंत्रणािीन चलती रही। मुखयालय प्रकगािण कमान ने बैंगलोर के उछच मैिानी िेत्र में मुखयालय नं. २ (प्रकगािण) ग्रुप आर आर् ए एफ की पबक्षल्डंग को अपने अिीकृत ककया था। एयर कमोडोर आर एच डी प्रथम ए ओ सी थे। ग्रुप कैप्टन आर आत्माराम प्रकगािण कमान के पहले एस ए एस ओ रहे।

पहले उड़ान प्रकगािण स्ककूल की हयवस्कथा वहां क्षस्कथत स्क्वाड्रन से ररसालपुर में की गर्। ये प्रकगािण स्ककूल भारतीय वायु सेना और आर ए एफ के तलए एक बार में ३८ पायलट और २० पयईवेिकों का उत्तरिातयत्व लेना था। वहां पर प्रारंतभक और उछच स्कतर िोनों प्रकार का प्रकगािण प्रिान ककया जाता था हालांकक स्ककूल प्रकगािण की जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहा था क्षजसके पररणामस्कवरूप तनम्नतलक्षखत हयवस्कथा की गर्ः-

(क) नं. १ आरंतभक प्रकगािण पवंग (आर् टी डदल्यू) यहां पर भारतीय वायु सेना के अफसर कैडेट को अनुगाासन कड्रल द्ाारीररक प्रकगािण और प्रारंतभक ग्राउंड पवヤााय का प्रकगािण किया जाता था। प्रारंभ में यह पवंग लाहौर में सेट अप की गर् और बाि में इसे पुणे में स्कथानांतररत कर किया गया। द्ााुरूआत में कोसई की अवति को १० सप्ताह से बढ़ाकर १४ सप्ताह की गर्। १९४३ में अवति को पुनः बढ़ाकर १८ सप्ताह कर किया गया।

(ख) नं. १ और २ प्रारंतभक उड़ान प्रकगािण स्ककूल (र् एफ टी एस) क्रमगाः बेगमपेट (हैिराबाि) और जोिपुर में क्षस्कथत थे। ये स्ककूल भारतीय वायु सेना अफसरों कैडेट और कुछ आर ए एफ पायलटों को आरंतभक उड़ान और मैिानी प्रकगािण िेते थे। आरंभ में यह पाठ यक्रम १० सप्ताह का होता था लेककन बाि में १२ सप्ताह के तलए बढ़ा किया गया।

(ग) नं. १ सपवईस फ्लाइंग टे्रतनंग सकूल (एस एफ टी एस) इसकी स्कथापना अंबाला में उछच और मध्यम स्कतर के उड़ान प्रकगािण और जमीनी प्रकगािण के तलए की गर्। स्ककूल को मध्यम और उछच स्कतरीय प्रकगािण स्क्वाड्रन में १० और ११ सप्ताह की अवति के तलए पवभाक्षजत ककया गया। १९४२ में ररसालपुर में एक संकक्रयात्मक प्रकगािण यूतनट के गठन के साथ मध्य और उछच स्कतरीय प्रकगािण स्क्वाड्रन को एक साथ कर किया गया और पूरे कोसई की अवति को घटाकर १८ सप्ताह कर किया गया।

आर् टी डदल्यू में भेजने से पूवई, अफसर कैडेट पायलट कोसई आरंतभक (ककसी भी तसपवल फ्लांइग ्लब में) उड़ान का अनुभव प्रिान ककया जाता था। एस एफ टी एस में प्रकगािण पूरा करने के बाि, पायलट को संकक्रयात्मक प्रकगािण पूरा करने के तलए यूतनट में तैनात ककया गया। प्रकगािण का कायई वर्ヤाा भर के भीतर १५० पायलटों और ५० तनरीिकों को प्रकगाक्षित करना था। १९४२ में अफसर कैडेट पायलटों को लगातार फ्लाइंग ्लब में भेजा गया। तत्पगचात भारतीय वायु सेना में स्कवीकृतत के बाि सीिा आर् टी डदल्यू गए। युद्द में जापान के प्रवेगा करने से पहले प्रकगािण द्ाांततपूवईक मामलों के आिार पर किया गया। १९४२ की द्ााुरूआत में फाइटर ऑपरेगानल ट्रेतनंग यूतनट ररसालपुर में और बॉम्बर ऑपनेगानल टे्रतनंग यूतनट पेगाावर में स्कथापपत की गर्।

सेनानी परिचालन प्रशिक्षण एक 12 सप्ताह रूपांतरण पाठ्यक्रम के स्क्वाड्रन प्रशिक्षण और तोपखाना प्रशिक्षण, और लड़ाकू टोही प्रशिक्षण का एक चार सप्ताह के पाठ्यक्रम सहित, तूफान के लिए पर थे।? जमीनी हमले स्क्वाड्रनों के लिए 1944 प्रतिस्थापन पायलटों से स्क्वाड्रनों के लिए तैनात किया जा रहा से पहले तीन सप्ताह के विशेष जमीनी हमले पाठ्यक्रम कराना पड़ा।

स्वतंत्रता के बाि अंबाला और जोिपुर में कैटेडों को प्रकगािण िेने के तलए वायु सेना अकािमी की स्कथापना हुर्। कमीगान प्रिान करने से पहले प्रेंकटस/टार्गरमोि और हावईडई में प्रकगािुओं को प्रकगािण प्रिान ककया जाता था। टाइगरमोि/पंा्रेकटस में कुल उड़ान प्रकगािण ८५.०० घंटों और हारवडई में १००.०० घंटों का होता था।

जून 51 से पंख पुरस्कार के बाद प्रशिक्षुओं Hakimpet में रूपांतरण प्रशिक्षण यूनिट के लिए भेजा गया। Tempests पर प्रशिक्षण / Spitfires (42.00 घंटे यहाँ प्रदान किया जा सकता है, 1953 तक इस्तेमाल किया, जिसके बाद शोषक जब नाम जेट प्रशिक्षण विंग में बदल गया था शामिल किया गया।? कुछ प्रशिक्षुओं 1953-55 के दौरान पिशाच Spitfires पर प्रशिक्षण और कुछ प्राप्त किया।? से जबकि 1956 में Spitfires वापस ले लिया गया और केवल शोषक प्रशिक्षण के लिए इस्तेमाल किया गया 1953 Tempests वापस ले लिया गया।? सीटीयू / JTW से पासिंग आउट प्रशिक्षुओं विभिन्न लड़ाकू स्क्वाड्रन के लिए भेजा गया।

परिवहन के लिए निर्धारित प्रशिक्षुओं रूपांतरण और आगरा में प्रशिक्षण स्क्वाड्रन (अगस्त 47 गठन) को रिपोर्ट करने के लिए इस्तेमाल उड़ान। वे डकोटा रूपांतरण जिसके बाद वे विभिन्न परिवहन स्क्वाड्रनों के लिए भेजा गया प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल किया।

जून ५१ से पवंग प्रिान ककए जाने के बाि प्रकगािुओं को कनवजईन टे्रतनंग यूतनट हाककमपेट में भेजा गया। टेंपेस्कट/क्षस्कपटफायर पर प्रकगािण (४२ घंटों का प्रकगािण) यहां किया जाता था। १९५३ तक वैंपायसई के नाम से बिलकर जेट ट्रेतनंग कमान रखा गया। १९५३-५५ के िौरान कुछ प्रकगािुओं ने क्षस्कपटफायर से और कुछ ने वैंपायसई से प्रकगािण प्राप्त ककया। १९५३ से टेम्पेस्कट हट गया जबकक १९५६ में क्षस्कपटफायर भी हटा किया गया केवल वैंपायर ही प्रकगािण के तलए चलता रहा। सी टी यू/जे टी डदल्यू से उत्तीणई होने के बाि प्रकगािुओ को पवतभन्न फाइटर स्क्वाड्रनों में भेजा जाता था। क्षजन प्रकगािुओं का ट्रांसपोटई फ्लाइंग के तलए नामांककत ककया जाता था उन्हें कनवजईन और टे्रतनंग स्क्वाड्रन (अगस्कत ४७ मे ांतनतमईत) में ररपोटई करना होता था जो आगरा में था। उन्हें डकोटा कनवजईन प्राप्त करना पड़ता था उसके बाि ही उन्हें पवतभन्न ट्रासंपोटई स्क्वाड्रन में भेजा जाता था।

प्रतशिातथईयों ने एच टी-२ एवं हावईडई पर उड़ान प्रकगािण प्राप्त ककया और उसके बाि वे लोग पररवहन एवं लड़ाकू द्ााखा में आए। पररवहन द्ााखा ने टी टी डदल्यू बेगमपेट में प्रकगािण तलया। लड़ाकू द्ााखा ने वैम्पायर पवमान पर लड़ाकू प्रकगािण पवंग, हाककमपेट में प्रकगािण तलया। यह जे टी डदल्यू के तलए एक नया नाम था। उन्नत स्कटेज के बाि प्रकगािातथईयों को कमीगान प्रिान ककया गया लेककन संबंतित चरण के पूरा ककए जाने के बाि भी पवंग प्रिान ककए गए। पवंग प्रिान ककए जाने के बाि ही प्रकगािाथी अफसरों को लड़ाकू एवं पररवहन स्क्वाड्रन में प्रवेगा किया गया।

पायलट प्रशिक्षण संस्थान पर प्रशिक्षु पायलटों उड़ान भरी एचटी-2 एसी केवल और वायु सेना फ्लाइंग कॉलेज में हार्वर्ड एसी उड़ान भरी। इस क्रम में किया गया था प्रत्येक जगह पर विमान का ही एक प्रकार है। हैदराबाद के पास नए वायु सेना अकादमी के कमीशन के साथ, सभी उड़ान प्रशिक्षण दक्षिण में केंद्रीकृत कर दिया गया है, बेसिक फ्लाइंग ट्रेनिंग स्कूल (बी एफ टी एस) इलाहाबाद में स्थित है, जो एचपीटी -32 एसी पर प्रशिक्षण आयोजित करता है के लिए छोड़कर।

तसतम्बर १९७३ में एच जे टी-१६ (ककरण) जो कक एक स्कविेगाी तनतमईत प्रकगािण वायुयान है ने वैम्पायर का स्कथान ले तलया। पररणामस्कवरूप एक बार कफर से उड़ान प्रकगािण को पुनः संगकठत ककया गया। ए एफ ए ने हावईडई एवं ककरण जेट प्रकगािक पर पायलटों को प्रकगािण िेना द्ााुरू ककया। १९७५ में हावईडई पवमान को चरणबद्द तरीके से हटा किया गया और अब ए एफ ए ककरन वायुयान पर उड़ान प्रकगािण िेता है क्षजसके प्रकगािातथईयों को कमीगान प्रिान ककया जाता है, बढ़ी हुर् प्रततबद्दता को पूरा करने के तलए अक्तूबर १९७५ में पोलैंड से टैन्डम सीट वाले प्रकगािक वायुयान आर् एस के आर ए एस को मंगवाए गए और अब प्रकगािण के तलए हककमपेट में उपयोग ककया जा रहा है।
शुरू में अलग इस्तेमाल किया सेवन पायलटों और नाविक के लिए पीछा किया जाना है।? द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, पायलट प्रशिक्षण में अपव्यय की उच्च दर के कारण, उन कैडेटों जो ग्रेड नहीं बना था के रूप में इस्तेमाल किया पायलटों नाविक के रूप में प्रशिक्षित करने के लिए मोड़ा जा सके। यह प्रशिक्षण शुरू में जोधपुर में नेविगेशन और सिग्नल स्कूल के बाहर किया गया था और पायलट प्रशिक्षुओं के साथ बाहर जाने के लिए इस्तेमाल किया प्रशिक्षुओं। 1957 से प्रशिक्षुओं ही में एन एस एस में उन्नत प्रशिक्षण के बाद चालू किया गया प्रारंभिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।

संचालन पवमान प्रकगािण के मामले में चयतनत अफसरों एवं वायुसैतनकों के तलए एयर तसगनल प्रकगािण, जोिपुर के एन एंड एस एस में किया गया। जनवरी १९६८ में इस स्ककूल को बेगमपेट में स्कथानांतररत ककया गया। प्रकगािण कमान मुखयालय, आर् ए एफ का कायई तनरंतर बढ़ता गया और संगठन में कर् नए कायजों को द्ाातमल करना पड़ा। कमान मुखयालय की स्कथापना में कर् संगाोिन ककए गए और कर् पिों को द्ाातमल ककया गया। ०८ अप्रैल १९६० को भारत के राヤट्रपतत ने ए ओ सी प्रकगािण कमान के पि की रैंक को एयर कमोडोर (सामान्य ड यूटी) से एयर वाइस मागाईल कर किया है तथा ए ओ सी के पि को भी पुनः कडजाइन करने की मंजूरी िी। हालांकक केवल तसतंबर १९६२ में एस ए एस ओ के पि को एयर कमोडर के रैंक में अद्तन ककया गया था।

१९४९ से पहले, रैंक द्वारा कमीगान प्राप्त तकनीकी अफसर नं. २ ने जी टी एस तांबरम में प्रकगािण प्राप्त ककया। जबकक सीिे प्रवेगा तलए अफसर को तकनीकी प्रकगािण के तलए यू के भेजा गया। १९४९ में भारत सरकार जालहल्ली में तकनीकी प्रकगािण कॉलेज की संकक्रया और स्कथापना के तलए एयर सपवईस टे्रतनंग तलतमटेड, हैंबल के साथ अनुबंि में आर्। इस कॉलेज में सीिे प्रवेगा करने वाले प्रकगािण प्राप्त तकनीकी अफसर और साथ ही इंजन इलैक्ष्ट्रकल तसगनल तथा आयुि िांच की रैंक में अतिकाररयों को प्रकगािण किया गया। इसके अततररक्त वायु सेना में लंबी अवति के तलए तनयुक्त होने के तलए युवा प्रकगािुओं को द्ौक्षिक प्रकगािण के साथ-साथ तकनीकी प्रकगािण भी किया जाता था। इन परवती वヤर्ाााोां में अनुिेगाक स्कटाफ िीरे-िीरे भारतीय अतिकाररयों में पररवततईत होते गए। ०४ जुलार् १९५६ में, पहली बार एक भारतीय अफसर कॉलेज के कमांडेंट के तौर पर तैनात हुए।

अधिकारियों के प्रशिक्षण के मामले में, एयरमैन की जमीन प्रशिक्षण जमीन प्रशिक्षण स्कूल में सभी प्रशिक्षण के माध्यम आधार पर पुनर्गठित किया गया था।? सभी के माध्यम से प्रशिक्षण योजना के तहत रंगरूटों एक ही स्कूल में सामान्य सेवा प्रशिक्षण और व्यापार प्रशिक्षण प्राप्त किया।? व्यापार प्रशिक्षण युक्तिसंगत बनाया गया था और 1949 में प्रशिक्षण संस्थानों के बीच बांटा जाता है, इस प्रकार है: -

(क) नं. 1 जी टी एस सभी गैर तकनीकी ट्रेडों।

(ख) एयरफ्रेम, इंजन और अन्य संबद्ध इंजीनियरिंग विषयों, और फोटो ट्रेडों में एयरमैन की संख्या 2 जी टी एस तकनीकी ट्रेडों।

(ग) नं.3 जी टी एस में स्ककूल ३१ अक्तूबर १९४९ और संकेतों, रडार, विद्युत उपकरण, हथियार और एयरफील्ड सुरक्षा ऑपरेटर की तरह तकनीकी ट्रेडों की ओर से खोला गया था नं.2 जी टी एस से स्थानांतरित कर दिया गया
1960 में, जमीन प्रशिक्षण गतिविधियों नवगठित इकाइयों के लिए एयरमैन की वृद्धि की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विस्तार किया गया। यह संख्या 4 ग्राउंड ट्रेनिंग स्कूल के गठन है जो व्यापार के प्रशिक्षण नं.2 जी टी एस पर आयोजित किया जा रहा करने के लिए समानांतर प्रशिक्षण दिया करने के लिए नेतृत्व किया।
1962 में, ग्राउंड ट्रेनिंग स्कूल आगे युक्तिसंगत बनाया गया था और स्कूलों व्यापार आधार पर पुनर्गठित किया गया। यह संख्या 5 के गठन और 6 ग्राउंड प्रशिक्षण स्कूल का नेतृत्व किया। इस के साथ निम्न ग्राउंड प्रशिक्षण स्कूल अस्तित्व में आया था

(क) नं. १ जी टी एस (सांबरा) सभी गैर तकनीकी टे्रड स।

(ख) नं. २ जी टी एस (सांबरा) तकनीकी टे्रड स और सहायक इंजीतनयररंग और फोटो।

(ग) नं. ३ जी टी एस (जालहल्ली) तथा इलैक्ष्ट्रकल तकनीकी टे्रड।

(घ) नं. ४ जी टी एस (तांबरम) नं. २ जी टी एस कोटा छोड़कर।

(च) नं. ५ जी टी एस (जालहल्ली) तकनीकी टे्रड स, इलैक्ष्ट्रकल तथा यांपत्रक।

(छ) नं. ६ जी टी एस (जालहल्ली) तकनीकी टे्रड स रडार और इलै्ट्रॉतन्स।

नं. ४ जी टी एस १९६७ में बंि हो गया और टे्रड स के वे सभी प्रकगािण नं. २ जी टी एस में प्रकगाक्षित ककए जाने लगे। जो बाि में नं. २ जी टी एस के साथ पवलय कर किया गया।

विदेशी नागरिकों के लिए प्रशिक्षण

इसके अलावा फ्लाइंग और जमीन चालक दल की अपनी खुद की आवश्यकता के प्रशिक्षण से, भारतीय वायुसेना भी विदेशी नागरिकों को प्रशिक्षण का कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम के प्रारंभिक लाभार्थियों बर्मा, इंडोनेशिया और यू ए आर थे। अब तक, श्रीलंका, मलेशिया, नाइजीरिया, केन्या, बोत्सवाना, अमरीका, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, घाना, इंडोनेशिया, मालदीव, मॉरीशस, लेबनान, नेपाल, तंजानिया, जाम्बिया आदि के रूप में मित्र देशों से 2600 से अधिक कर्मियों द्वारा प्रशिक्षित किया गया है भारतीय वायु सेना।
भारत में विदेशी नागरिकों को प्रशिक्षण के अलावा, हम भी यू ए आर, इराक, इथियोपिया, जाम्बिया, मिस्र, ईरान, नाइजीरिया और सिंगापुर के लिए वायु सेना प्रशिक्षण टीमों के लिए भेज दिया है।

 

एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह 
अतिविशिष्ट सेवा मेडेल वीर चक्र विशिष्ट सेवा मेडल ए डी सी  
प्रशिक्षण कमान भारतीय वायु सेना
एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह अतिविशिष्ट सेवा मेडेल वीर चक्र विशिष्ट सेवा मेडल ए डी सी राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के पूर्व छात्र हैं तथा आपको 29 दिसंबर 1982 को भारतीय वायु सेना के उडान शाखा में हेलिकाप्टर पायलेट के रूप में नियुक्त किया गया। अड़तीस वर्षों से अधिक अपनी उत्कृष्ट सेवा काल के दौरान वायु अधिकारी ने विभिन्न प्रकार के हेलीकॉप्टर एवं प्रशिक्षक विमान उडाए हैं। आप विशाल अनुभव युक्त उड़ान अनुदेशक है जिन्होंने सियाचिन, देश के पूर्वोत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिमी रेगिस्तान एवं लोकतांत्रिक गणराज्य काँगो जैसे विभिन्न चुनौती पूर्ण क्षेत्रों में 6600 घंटों से अधिक दुर्घटना मुक्त उडान भरी है। आप रक्षा सेवा स्टाफ कॉलेज वेलिंगटन, संयुक्त सेवा स्टाफ कॉलेज (यु एस ए) और सेना वार कॉलेज मऊ के पूर्व छात्र रहे हैं।


अपनी विश्रुत सेवा काल के दौरान, वायु अधिकारी ने कई महत्वपूर्ण पदभार संभाले हैं। आप 1989 से 1991 तक वायु सेना अकादमी में किरण वायुयान के अनुभवी उडान अनुदेशक रहे हैं। आपने एक अग्रवर्ती वायु सेना बेस की भी कमान संभाली है और बाद में एकीकृत रक्षा स्टाफ मुख्यालय में निदेशक सी-412 के पद पर भी सेवारत रहे हैं।  2009-10 के दौरान, लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो बुकाँऊ में आप भारतीय वायु सेना के शांति संरक्षण दल के कमांडर रहे तथा वायु सेना मुख्यालय में प्रधान निदेशक (आसूचना) रहे और तत्पश्चात वायु सेना स्टेशन नई दिल्ली की भी कमान संभाली। त्रि-सेवा संयुक्त संस्थान में भी आपने सेवा की है। आपने एकीकृत स्टाफ़ सेवा मुख्यालय में एकीकृत रक्षा स्टाफ के सह अध्यक्ष (संयुक्त संचालन), पूर्वी कमान मुख्यालय के वरिष्ठ  प्रशासनिक प्रभारी अफसर, अनुरक्षण कमान मुख्यालय के वरिष्ठ वायु तथा प्रशासनिक स्टाफ अफसर और दक्षिणी वायु कमान मुख्यालय के वरिष्ठ वायु स्टाफ अफसर जैसे पद भी संभाले हैं। वर्तमान नियुक्ति के पहले आप वायु सेना मुख्यालय में (निरीक्षण एवं सुरक्षा) महानिदेशक थे । भारतीय वायु सेना में अपनी अतुलनीय एवं सराहनीय सेवा का सम्मान करते हुए आपको अति विशिष्ट सेवा मेडल, वीर चक्र एवं विशिष्ट सेवा मेडल से पुरस्कृत किया गया। आपको दिनांक  01 सितंबर 2021 को भारत के राष्ट्रपति के संमानित ए डी सी के रूप में नियुक्ति प्रदान की गई। 
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जन संपर्क अधिकारी
प्रशिक्षण कमान मुख्यालय भा वा से
जे सी नगर पोस्ट

बंगलौर - 560006
संपर्क टेलीफोन नंबर
दूरभाष : 080-23411081 (विस्तार-7560)
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